Devendra Fadanvis : फडणवीसांची फटकेबाजी; सांगितले लहानपणीचे रेडिओचे किस्से Special Report
Devendra Fadanvis : फडणवीसांची फटकेबाजी; सांगितले लहानपणीचे रेडिओचे किस्से Special Report
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पाहूया त्यात मुख्यमंत्र्यांनी केलेली फटकेबाजी, बहुत ही उमदा दिन चुना है आपने वर्ल्ड म्यूजिक डे, आपके लिए म्यूजिक क्या मायने रखता है? मुझे ऐसा लगता है कि मेरे लिए म्यूजिक के हीलर है. म्यूजिक के स्ट्रेस बस्टर है और मुझे जब भी समय मिलता है या जब भी मुझे डिस्ट्रेस होना है तो मैं म्यूजिक सुनता हूं मैं प्रवास करता हूं तो सारे प्रवास में मैं अ गाने सुनता हूं और मैं ऐसा मानता हूं कि उससे हम अपने जो इमीडिएट प्रॉब्लम्स है उसको भूलकर एक दूसरी दुनिया में जाते हैं इसलिए म्यूजिक मेरे लिए दोस्तों कहलाता है हारी बाजी को सर आपके घर में रेडियो का क्या माहौल होता था बचपन में देखिए बचपन में तो रेडियो ही था और मुझे अभी भी याद है कि जब काफी छोटे थे तो हमारे चाचा जी की आदत थी सुबह 6 बजे पुराने गाने आते थे शमशाद बेगम के वगैरह ऐसे सारे 6 बजे आते थे अपने विविध भारती पर यानी अपना जो नेशनल रेडियो है उसके ऊपर तो 6 बजे वो पहले सबसे पहले वो लगते थे हमारे यहां और हम लोग जब बड़े हुए तो हमारे लिए तो बिना का गीतमाला या सिभा का गीतमाला ये तो बहुत मुझे ऐसा लगता है कि सभी को पसंद थी और एक सबसे बड़ी बात मैं जो रेडियो के बारे में कहना चाहता हूं कि देखिए जो ऑडियो विजुअल होता है उसमें एक्सप्रेशन आसान होता है क्योंकि वो दिखता है लेकिन रेडियो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि व्यक्ति दिखता नहीं है, लेकिन फिर भी सारी चीजें एक्सप्रेस करता है अपने शब्दों से और कई बार हम लोग रेडियो के ऊपर छोटी नाटिकाए सुनते थे, उस समय रेडियो पर नाटिका आती थी, उन नाटिकाओं में जो पात्रों को जीवित करने का काम अपने शब्दों के माध्यम से ऐसा लगता था कि वह घटना हमारे सामने घट रही है, तो मैं ऐसा मानता हूं, अभिव्यक्ति जो होती है ना, उसके लिए कोई भी माध्यम ये काफी होता है, आम्ही असही ऐकल की मॉडलिंग सोबत तुम्हाला लिहिण्याचाही छंद आहे, तुम्ही गीतकार किंवा कवी सुद्धा आहात तर पहिले काय लिहिलं होतं ते या निमित्ताने आठवत का? मी खरं म्हणजे तुम्हाला सांगू का? तसा मी रामदास आठवले घराण्याचा कवी आहे. आम्हाला शीघ्र कविताही चालेल हरकत नाही. तुम्ही आहात अरजी, मला येत नाही फारसी. बाहेर लावली आरसी. एक एक कविता लिहिली होती, मला आठवली तर म्हणतो ती. तुम्ही म्हणता माझ्या कवितेला अर्थ नसतो. तुम्ही. म्हणता माझ्या कवितेला अर्थ नसतो, नसे ना काय अर्थ अनर्थ त असतो. अरे तुम्ही काय कविता कराल? पण आणि किंवा परंतु अशा अर्थपूर्ण शब्दांचा निरर्थक शाब्दिक गुणता म्हणजे कविता नव्हे, पण आणि किंवा परंतु अशा निरर्थ अर्थपूर्ण शब्दांचा निरर्थक शाब्दिक गुणता म्हणजे कविता नव्हे, कविता म्हणजे जी मनाला छेदून गेली. हृदयाला भेदून गेली पाहिजे आणि डोक्याच्या वरून गेली पाहिजे.
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