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पीएम मोदी ने कहा कि मुझे और एक बात के लिए भी आपका और दुनिया के लोगों का आभार व्यक्त करना है. 21 जून को फिर से एक बार योग दिवस में उमंग के साथ, एक-एक परिवार के तीन-तीन चार-चार पीढ़ियां, एक साथ आ करके योग दिवस को मनाया.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नशा नाम की कहानी पढ़ते समय मेरा मन अपने-आप ही समाज में व्याप्त आर्थिक विषमताओं पर चला गया. मुझे अपनी युवावस्था के दिन याद आ गए कि कैसे इस विषय पर रात-रात भर बहस होती थी.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम स्वागत सत्कार में फूलों के बजाय किताबें दें. उनके इस आग्रह पर काफ़ी जगह लोग अब उन्हें किताबें देने लगे हैं. मुझे हाल ही में किसी ने ‘प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानियां’ नाम की पुस्तक दी. प्रवास के दौरान मुझे उनकी कुछ कहानियां फिर से पढ़ने का मौका मिल गया. प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में समाज का जो यथार्थ चित्रण किया है, पढ़ते समय उसकी छवि आपके मन में बनने लगती है.'
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संकट को लेकर सामूहिक भागीदारी की अपील की. उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास से बड़े सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं. पूरे देश में जल संकट से निपटने का कोई एक फॉर्मूला नहीं हो सकता है. इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग तरीके से प्रयास किये जा रहे हैं. लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है, और वह है पानी बचाना, जल संरक्षण. जब हम एकजुट होकर, मजबूती से प्रयास करते हैं तो असंभव को भी संभव कर सकते हैं जब जन-जन जुड़ेगा, जल बचेगा.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि भारत में 61 करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट दिए, दुनिया के हिसाब से चीन को छोड़ कर किसी भी देश की आबादी से ज्यादा लोगों ने वोट किया. यह हमारे लोकतंत्र की विशालता और व्यापकता का परिचय कराता है.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात कार्यक्रम में प्रेमचंद्र की कहानी 'ईदगाह', 'पूस की रात' और 'नशा' का जिक्र किया और कहा कि हमें किताबें पढ़नी चाहिए.
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पीएम मोदी ने कहा कि जब देश में आपातकाल लगाया गया तब उसका विरोध सिर्फ राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं रहा था, राजनेताओं तक सीमित नहीं रहा था, जेल के सलाखों तक, आंदोलन सिमट नहीं गया था. जन-जन के दिल में एक आक्रोश था. खोए हुए लोकतंत्र की एक तड़प थी. दिन रात जब समय पर खाना खाते हैं तब क्या भूख क्या होती है इसका पता नहीं होता है वैसे ही सामान्य जीवन में लोकतंत्र के अधिकारों की क्या मजा है वो तब पता चलता है जब कोई लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन लेता है. आपतकाल में, देश के हर नागरिक को लगने लगा था कि उसका कुछ छीन लिया गया है.
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पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें काफी चिट्ठियां आती हैं, टेलीफोन कॉल आते हैं, सन्देश मिलते हैं, लेकिन उनमें शिकायत का तत्व बहुत कम होता है और किसी ने कुछ अपने लिए मांगा हो, ऐसी बात, गत पांच वर्ष में उनके ध्यान में नहीं आती है.
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पीएम मोदी ने कहा कि मन की बात के लिए जो चिट्ठियां आती हैं, एक प्रकार से वह भी मेरे लिये प्रेरणा और ऊर्जा का कारण बन जाती है. कभी-कभी तो मेरी विचार प्रक्रिया को धार देने का काम आपके कुछ शब्द कर देते हैं.
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पीएम मोदी ने कहा कि 'मन की बात के इस अल्पविराम के कारण जो खालीपन था, केदार की घाटी में, उस एकांत गुफा में, कुछ भरने का अवसर जरूर दिया, जैसे केदार के विषय में लोगों ने जानने की इच्छा व्यक्त की, वैसे एक सकारात्मक चीजों को बल देने का आपका प्रयास, आपकी बातों में लगातार मैं महसूस करता हूं.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक लंबे अंतराल के बाद आपके बीच मन की बात, जन-जन की बात, जन-मन की बात इसका हम सिलसिला जारी कर रहे हैं. चुनाव की आपाधापी में व्यस्तता तो ज्यादा थी लेकिन मन की बात का मजा ही गायब था, एक कमी महसूस कर रहा था. हम 130 करोड़ देशवासियों के स्वजन के रूप में बातें करते थे.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार मन की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा था कि मैं इस कार्यक्रम को मिस कर रहा था.