BMC 22 years Corporator : BMC वॉर्ड नं 151 मधून 22 वर्षांची तरुणी झाली नगरसेवक! कसा होता प्रवास?

BMC 22 years Corporator : BMC वॉर्ड नं 151 मधून 22 वर्षांची तरुणी झाली नगरसेवक! कसा होता प्रवास?

जी 22 वर्षीय तरुणी आहे ती सुद्धा फ्रेम मध्ये आहे ती म्हणजे कशिश फुलवारे आपण थेट बातचीत करणार आहोत कसा अनुभव होता काय स्वप्न होतं आणि इथपर्यंतचा प्रवास कशिश खरं तर अभिनंदन तुला आणि पुढील वाटचालीसाठी शुभेच्छा पण महत्त्वाचा मुद्दा आहे की सगळ्यात तरुण उमेदवार म्हणून तू आता सभागृहात असणार आहे काय वाटतंय? पहले तो बहुत अच्छा लग रहा है इतना अच्छा रिस्पॉन्स था सबने इतनी मेहनत की कार्यकर्ताने इतनी मेहनत की मुझे विजय बनाने के लिए सबका मैं धन्यवाद करना चाहती हूं सब समाज का धन्यवाद करना चाहती हूं अ पर अभी जब आप जब बीएमसी चुनाव के बीएमसी में जाओगे तो बहुत दिग्गज लोग जो है कि आपके सामने रहेंगे उनसे डील करना और साथ में सत्ताधारी पार्टी से 151 को रिप्रेजेंट करना उसका क्या प्लानिंग रहेगा कैसे नियोजन रहेगा प्लानिंग तो अभी चालू है जैसे कि मेरे पापा एक कॉर्पोरेटर रह चुके हैं तो उनसे मैं गाइडन्स लूंगी कि कैसे क्या बातचीत करना है लोगों से कैसे वन टू वन टॉक करना है तो वैसे मैं गाइडन्स लेती रहूंगी और हाउस में भी वहां भी मेरे को थोड़ा उन्होंने बताया है कैसे क्या होने वाला है तो आय प्रिपेर्ड ये प्रिपरेशन तो चालू हो जाएगा पर इसके पहले आप क्या प्रिपेयर कर रहे थे क्योंकि एट द एज ऑफ 20 मतलब 22 साल में तो हम पढ़ाई करते हैं आप क्या पढ़ रहे थे ग्रेजुएशन हो गया है क्या और अभी क्या चल रहा था मतलब अ ग्रेजुएशन मेरा हो गया है और करेंटली मैं एमबीए भी कर रही हूं और ये इलेक्शन का आया तो पापाने पूछा करके कि ऐसी ऐसी बात है वुमेन सीट है तू अ रेडी है क्या तो मैंने बोला हां ठीक है सोशल वर्क के लिए मैं आगे हूं करके और मम्मी पापा 15-20 इयर्स से पॉलिटिकल उनका है करियर है उसमें और उनको मैंने देखा है बचपन से काम करते हुए तो है मुझे आइडियाज पहले मतलब 2007 से आपका पूरा घर जो है वो राजनीति में है पहले मम्मी या पापा के पैंफलेट बांटने वाली कशिश अभी खुद का पैंफलेट आपके मम्मी डैडी बांट रहे थे क्या फीलिंग थी और क्या भावना थी फीलिंग तो बहुत अच्छी थी ऐसे अनरियल लग रहा था कि मैं हूं करके बहुत अच्छा लगा कल जब अ रिजल्ट आया डिक्लेअर हुआ तब आपके मन में क्या चल रहा था सबसे पहले किसको याद किया क्या किया सबसे पहले तो मेरे मेरे दादाजी को याद किया जो कि अभी वो नहीं है वो होते तो बहुत खुश होते थे और भाजपा की महायुती को भी मैं धन्यवाद करना चाहती हूं करके उन्होंने मुझे मौका दिया और इतने वोट्स आएंगे ऐसे मेरे को मेरे को एक्सपेक्टेड नहीं था पर बाकी सबको एक्सपेक्टेड था तो बहुत अच्छा लगा अब तो नया प्रयास चालू हो गया है बट जो एमबीए का करने का सपना था वो साथ ही साथ चालू रहेगा कि उसको ब्रेक लग जाएगा वो भी साथ-साथ चलता रहेगा और ये भी चलता रहेगा आपके साथ राजेश फुलवारे सुद्धा है राजेशजी पहले आपका चुनाव उसके बाद पत्नी का चुनाव उसके बाद भाजपा का काम और अब बेटी के लिए संघर्ष और उसके बाद विनिंग क्या भावना है आज नहीं भावना तो क्या बोलूं पहले तो पार्टी को धन्यवाद करता हूं अ माननीय नरेंद्र मोदीजी अमित साटमजी और देवेंद्र फडणवीसजी और आशीष शेलारजी और पराग आनंदीजी जो इतना बड़ा विश्वास किया पार्टीने मुझपे और जब लेडीस हुई तभी इससे पूछा तो इसमें इसको हां बनने के बाद में पार्टी के सामने बात रखी पार्टीने भी उसपे विश्वास रखके इसको टिकट दिया और चुनके आई तो ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है आपने देखा कि अ जब ये टिकट आपकी बेटी के लिए आपके परिवार के लिए डिक्लेअर हुआ उसके बाद बहुत चर्चाएं शुरू हो गई थी क्यों दिया जा रहा है ऐसा वैसा इन सबको कैसे डील किया गया नहीं हमने तो जो भी है काम किया ऊपर बोला था जो हमारा पार्टी में है मैंने क्या काम किया और जनता के लिए क्या काम किया तो उस वही बात हमने पार्टी के सामने और लोगों के सामने रखी उसी आधार पे हम लोग आगे चले थे वार्ड 151 मतलब यहां से आप जीतके आए पहले भी चुनाव लड़े हैं ये रिजर्व हो गया था इसी मुद्दे को लेके बहुत लोगोंने आपकी पार्टी से और पार्टी के बाहर के लोगोंने जो है मुद्दा बनाया गया था कि कहा जा रहा था कि झूठा कास्ट सर्टिफिकेट दिया जा रहा है जानबूझके सीट ली जा रही है उन सबको अब आपका क्या कहना है ठीक है ऐसा 2007 में भी मैंने एससी सीट में चुनाव लड़ा था फिर वो 2012 में लेडीस थी वाइफ थी फिर 2000 अ 12 में फिर बाद में अ 2017 में ओपन सीट थी उसके बाद में फिर अभी ये हुई वो सबसे इलेक्शन जो एससी सीट थी लड़की का भी कास्ट सर्टिफिकेट है उसके आधार पे हमने अ टी अ क्या अ यहां पे दिखाया था कास्ट का वो इस तरह से बैठता है उस हिसाब से हमने काम किया उसमें तो स्कूटनी में स्कूटनी में कोई दिक्कत स्कूटनी में कोई दिक्कत नहीं आई थी उन्होंने विरोध जरूर किया था इन्होंने और इन्होंने ऐसा भी नहीं कि अभी किया 2017 में भी इन्होंने विरोध किया था 2017 में ओपन होने के बावजूद भी इन्होंने विरोध किया उसके बाद में 2017 में कोर्ट में गए थे लोग कोर्ट में दोनों तीनों पार्टी वालेने जाके केस भी डाले और कोर्ट में केस में हार भी गए थे और अब उनका काम है ऐसा नहीं कि भाई मैं मुझे ही अकेले टारगेट कर रहे पूरे मुंबई में ऐसा नहीं ऐसा हर पार्टीवाले करते एक-दूसरे पे वो आरोप करते हैं उनका काम है कोई कुछ ना कुछ कुछ गलती दिखे तो ये कुछ मेरा काम की कुछ कमी नहीं दिख रही थी तो आखिर में इस चीज को उन्होंने पकड़ा है राजनीतिक चर्चाएं तो चलती रहेगी कशिश फुलवारे इनके साथ ही सोबत है देखो आपके पति है आपने भी चुनाव लड़ा है पर जब बेटी के लिए आगे जाना था तब क्या मन में था क्योंकि एक मां और बेटी का अलग से रिश्ता रहता है देखो मैंने वही सोचके इसको आगे बढ़ाया कि चलो मैं नहीं ले पाई एससी सीट तो चलो मेरी बेटी के पास है तो मैं इसको मौका क्यों नहीं दूं मैं कि देखो उम्र के कोई नहीं होता है 22 की हो चाहे 50 की हो चाहे 80 की हो जब अंदर अपने जज्बा हो तो हम लोग कोई भी चीज कामयाब हासिल कर सकते हैं तो मैंने उन लोगोंको इसको हिम्मत दिलाई कि नहीं तू कर सकती है तो ये भी कॉन्फिडेंट थी हम भी कॉन्फिडेंट थे तो उस बेसिक्स पे हम लोगोंने ये कदम उठाया गया कल जब अ चुनाव का निकाल आया उसके बाद आपके मन में क्या था क्योंकि आप चुनाव जीत गए थे आपकी बेटी चुनाव जीत गई देखिए बेटी पहले बाद में है पहले ये उम्मीदवार है बेटी घर तक है ये जनता के लिए एक उम्मीदवार है तो हमें वो इसने सब समाजने मिलके वोट दिया है इसका मान रखा है वो समाज का भी आज नाम ऊंचा हुआ है 

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